पसान में बन रहा ‘मौत का ढांचा’, एक तरफ बच्चों की भविष्य दूसरी तरफ भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा हो रहा हाई स्कूल भवन

■ बिना वाइब्रेटर के ढलाई, बीम-कॉलम टेढ़े; प्लास्टर की ‘लीपापोती’ कर कमियों को छिपाने का खेल जारी
मिथलेश आयम, पसान/कोरबा। कोरबा जिले की जनपद पंचायत पोड़ी-उपरोड़ा के ग्राम पंचायत पसान में बच्चों के भविष्य को संवारने के नाम पर उनकी जिंदगी से सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। यहाँ निर्माणाधीन शासकीय बालक हाई स्कूल भवन विकास का प्रतीक कम और भ्रष्टाचार का जीता-जागता नमूना ज्यादा नजर आ रहा है। ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की साठगांठ से सरकारी राशि का ऐसा ‘बंदरबांट’ किया जा रहा है कि स्कूल की इमारत बनने से पहले ही ढहने की कगार पर पहुंच गई है। घटिया निर्माण से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब इस मामले को लेकर जनदर्शन में मोर्चा खोल दिया है।

कंक्रीट गायब, गिट्टियां झांक रहीं बाहर ‘हनीकॉम्ब’ ने खोली पोल :-
ग्रामीणों द्वारा जनदर्शन में सौंपे गए शिकायती पत्र में निर्माण कार्य की जो हकीकत बयां की गई है, वह रोंगटे खड़े करने वाली है। आरोप है कि भवन के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से कॉलम और बीम की ढलाई में भारी लापरवाही बरती गई है। निर्माण के दौरान वाइब्रेटर मशीन का इस्तेमाल तक नहीं किया गया, जिसके कारण कंक्रीट सही तरीके से सेट नहीं हो पाई। नतीजा यह है कि पिलर्स में जगह-जगह ‘हनीकॉम्ब’ बन गया है। और गिट्टियां बाहर झांक रही हैं। जो पिलर पूरी इमारत का वजन उठाने के लिए होते हैं, वे खुद ही खोखले और कमजोर नजर आ रहे हैं।

इंजीनियरिंग का अनोखा नमूना टेढ़े-मेढ़े खड़े कर दिए पिलर :-
ग्रामीणों ने तकनीकी लापरवाही का पर्दाफाश करते हुए बताया कि भवन के बीम और कॉलम सीधे होने के बजाय टेढ़े-मेढ़े बनाए गए हैं। निर्माण में इस्तेमाल हो रही गिट्टी, सीमेंट और सरिया की क्वालिटी इतनी रद्दी है कि उसकी मजबूती पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। हद तो तब हो गई जब अपनी इस ‘काली करतूत’ को छिपाने के लिए ठेकेदार द्वारा आनन-फानन में प्लास्टर की ‘लीपापोती’ शुरू कर दी गई, ताकि प्रशासनिक अफसरों की आंखों में धूल झोंकी जा सके।

क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है प्रशासन:-
ग्रामीणों का साफ कहना है कि सरकारी पैसे का दुरुपयोग कर महज खानापूर्ति के लिए जल्दबाजी में यह ढांचा खड़ा किया जा रहा है। फिनिशिंग के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की जा रही है। ”कल को जब इस भवन में सैकड़ों मासूम बच्चे बैठकर पढ़ेंगे और कोई अनहोनी हो गई, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है” ग्रामीणों ने जांच होने तक तुरंत काम को रोका जाए मांग किए है शिकायतकर्ता ने प्रशासन से इस पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। निर्माण में प्रयुक्त सामग्री (सीमेंट, सरिया, गिट्टी) के सैंपल लेकर लैब टेस्ट कराए जाएं। जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। और भ्रष्टाचार में लिप्त ठेकेदार और आंखें मूंदकर बैठे दोषी विभागीय अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो। अब देखना यह है कि ग्रामीणों की इस गंभीर और तीखी शिकायत के बाद जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागता है या फिर बच्चों की सुरक्षा को ताक पर रखकर इस भ्रष्टाचार को शह दी जाती रहेगी।















